हज़रत अली(अ) फ़रमाते है: जब भी कामों से सब्र व इस्तेक़ामत ख़त्म हो जायेगें, ज़िन्दगी के सारे काम तबाही व बर्रबादी की तरफ़ चले जायेगें।